श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का राजा को उपालम्भ देते हुए कैकेयी से कौसल्या आदि के अनिष्ट की आशङ्का बताकर लक्ष्मण को अयोध्या लौटाने के लिये प्रयत्न करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.53.7 
सा हि देवी महाराजं कैकेयी राज्यकारणात्।
अपि न च्यावयेत् प्राणान् दृष्ट्वा भरतमागतम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'ऐसा भी हो सकता है कि भरत को आते देख रानी कैकेयी राज्य के लिए राजा के प्राण भी त्याग दें।
 
‘It may so happen that Queen Kaikeyi, on seeing Bharata arriving, may even sacrifice the life of the King for the sake of the kingdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)