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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 53: श्रीराम का राजा को उपालम्भ देते हुए कैकेयी से कौसल्या आदि के अनिष्ट की आशङ्का बताकर लक्ष्मण को अयोध्या लौटाने के लिये प्रयत्न करना
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श्लोक 30
श्लोक
2.53.30
नैतदौपयिकं राम यदिदं परितप्यसे।
विषादयसि सीतां च मां चैव पुरुषर्षभ॥ ३०॥
अनुवाद
'पुरुषोत्तम श्री राम! आपका इतना व्याकुल होना उचित नहीं है। ऐसा करके आप सीता को और मुझे भी दुःख पहुँचा रहे हैं।॥30॥
'Purushottam Shri Ram! It is not at all appropriate for you to be so agitated. By doing this you are causing sorrow to Sita and me as well.॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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