श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का राजा को उपालम्भ देते हुए कैकेयी से कौसल्या आदि के अनिष्ट की आशङ्का बताकर लक्ष्मण को अयोध्या लौटाने के लिये प्रयत्न करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.53.29 
ध्रुवमद्य पुरी राम अयोध्याऽऽयुधिनां वर।
निष्प्रभा त्वयि निष्क्रान्ते गतचन्द्रेव शर्वरी॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, हे श्री राम! आज आपके आगमन से अयोध्यापुरी निश्चय ही अमावस्या की रात्रि के समान नीरस हो गई है।
 
'O best among weapon bearers, O Shri Ram! With your coming today Ayodhyapuri has certainly become as dull as a moonless night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)