श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 53: श्रीराम का राजा को उपालम्भ देते हुए कैकेयी से कौसल्या आदि के अनिष्ट की आशङ्का बताकर लक्ष्मण को अयोध्या लौटाने के लिये प्रयत्न करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.53.11 
सुखी बत सुभार्यश्च भरत: केकयीसुत:।
मुदितान् कोसलानेको यो भोक्ष्यत्यधिराजवत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'कैकेयी का पुत्र भरत एक सुखी और सौभाग्यशाली स्त्री का पति है, जो अकेले ही योग्य पुरुषों से भरे कोसल देश पर सम्राट की तरह शासन करेगा।' 11.
 
'Bharata, the son of Kaikeyi, is the husband of a happy and fortunate woman who alone will rule the Kosala country full of able-bodied men like an emperor.' 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)