Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.51.7: 'चूँकि मैं हमेशा इसी जंगल में विचरण करता रहता हूँ, इसलिए मुझसे कुछ भी छिपा नहीं है। यहाँ हम दुश्मन की चार टुकड़ियों वाली विशाल और शक्तिशाली सेना को आसानी से हरा देंगे।' | ramayan सर्ग 2.51: निषादराज गुह के समक्ष लक्ष्मण का विलाप । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मेऽस्त्यविदितं किंचिद् वनेऽस्मिंश्चरत: सदा।
चतुरङ्गं ह्यतिबलं सुमहत् संतरेमहि॥ ७॥
अनुवाद
'चूँकि मैं हमेशा इसी जंगल में विचरण करता रहता हूँ, इसलिए मुझसे कुछ भी छिपा नहीं है। यहाँ हम दुश्मन की चार टुकड़ियों वाली विशाल और शक्तिशाली सेना को आसानी से हरा देंगे।'
'Since I always roam around in this forest, nothing is hidden from me. Here we will easily defeat the enemy's huge and powerful army of four divisions.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥