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ramayan 2.51.20: ‘जब उनकी मृत्यु का समय आएगा, तब जो लोग वहाँ उपस्थित होकर मेरे मृत पिता रघुकुल के रत्न दशरथ का सम्पूर्ण क्रियाकर्म करेंगे, वही सफल मनोरथ प्राप्त करने वाले और सौभाग्यशाली होंगे॥ 20॥   |   ramayan सर्ग 2.51: निषादराज गुह के समक्ष लक्ष्मण का विलाप   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 51: निषादराज गुह के समक्ष लक्ष्मण का विलाप  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.51.20 
सिद्धार्था: पितरं वृत्तं तस्मिन् काले ह्युपस्थिते।
प्रेतकार्येषु सर्वेषु संस्करिष्यन्ति राघवम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘जब उनकी मृत्यु का समय आएगा, तब जो लोग वहाँ उपस्थित होकर मेरे मृत पिता रघुकुल के रत्न दशरथ का सम्पूर्ण क्रियाकर्म करेंगे, वही सफल मनोरथ प्राप्त करने वाले और सौभाग्यशाली होंगे॥ 20॥
 
'When the time of his death arrives, those who will be there and perform all the rituals of my dead father, Dasharatha, the jewel of the Raghukul, are the ones who will have a successful wish and will be fortunate.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)