श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 50: श्रीराम का शृङ्गवेरपुर में गङ्गा तट पर पहुँचकर रात्रि में निवास, वहाँ निषादराज गुह द्वारा उनका सत्कार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.50.18 
देवसंघाप्लुतजलां निर्मलोत्पलसंकुलाम्।
क्वचिदाभोगपुलिनां क्वचिन्निर्मलवालुकाम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अनेकों देवता उसके जल में डुबकी लगाते हैं। कहीं-कहीं उसका जल नीले कमलों या कुमुदिनियों से आच्छादित है। कहीं विशाल समुद्रतट दिखाई देता है, तो कहीं-कहीं शुद्ध बालू का ढेर दिखाई देता है॥18॥
 
The multitudes of gods take a dip in its water. At some places its water is covered with blue lotuses or lilies. At some places a huge seashore is seen and at other places a mass of pure sand.॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)