श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 50: श्रीराम का शृङ्गवेरपुर में गङ्गा तट पर पहुँचकर रात्रि में निवास, वहाँ निषादराज गुह द्वारा उनका सत्कार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.50.11 
मध्येन मुदितं स्फीतं रम्योद्यानसमाकुलम्।
राज्यं भोज्यं नरेन्द्राणां ययौ धृतिमतां वर:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कोसल से चलकर, धैर्यवानों में श्रेष्ठ श्री रामजी मध्यम मार्ग से उस राज्य में गए जो सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण था, धन-धान्य से भरपूर था, सुन्दर उद्यानों से युक्त था और सामन्त राजाओं के भोग के लिए था ॥ 11॥
 
On proceeding from Kosala, Sri Rama, the best of the patient, through the middle path passed through a kingdom which was full of comforts and amenities, was rich in wealth and grains, was filled with beautiful gardens and was meant for the enjoyment of the feudal kings. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)