श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 50: श्रीराम का शृङ्गवेरपुर में गङ्गा तट पर पहुँचकर रात्रि में निवास, वहाँ निषादराज गुह द्वारा उनका सत्कार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.50.1 
विशालान् कोसलान् रम्यान् यात्वा लक्ष्मणपूर्वज:।
अयोध्यामुन्मुखो धीमान् प्राञ्जलिर्वाक्यमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार कोसल की विशाल एवं सुन्दर सीमा को पार करके, लक्ष्मण के बड़े भाई बुद्धिमान श्री राम अयोध्या की ओर मुड़े और हाथ जोड़कर बोले -॥1॥
 
Having thus crossed the vast and beautiful border of Kosala, the intelligent Sri Rama, the elder brother of Lakshmana, turned towards Ayodhya and with folded hands said -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)