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श्लोक  2.5.6 
तमागतमृषिं रामस्त्वरन्निव ससम्भ्रमम्।
मानयिष्यन् स मानार्हं निश्चक्राम निवेशनात्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
श्री राम वहाँ आये हुए आदरणीय महर्षि का सम्मान करने के लिए बहुत शीघ्रतापूर्वक अपने घर से चले गये।
 
Sri Rama left his house very hastily and quickly to honour the esteemed Maharshi who had come there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)