Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.5.26: सुन्दर वस्त्राभूषणों से युक्त सुन्दर स्त्रियों से भरे हुए इन्द्र के महल की शोभा से उस सुन्दर महल को प्रकाशित करते हुए राजा दशरथ उसमें ऐसे प्रवेश कर गए जैसे चन्द्रमा तारों से भरे आकाश में प्रवेश करता है॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 2.5: वसिष्ठजी का सीता सहित श्रीराम को उपवास व्रत की दीक्षा देना,राजा दशरथ का अन्तःपुर में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 5: वसिष्ठजी का सीता सहित श्रीराम को उपवास व्रत की दीक्षा देना,राजा दशरथ का अन्तःपुर में प्रवेश  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.5.26 
तदग्र्यवेषप्रमदाजनाकुलं
महेन्द्रवेश्मप्रतिमं निवेशनम्।
व्यदीपयंश्चारु विवेश पार्थिव:
शशीव तारागणसंकुलं नभ:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सुन्दर वस्त्राभूषणों से युक्त सुन्दर स्त्रियों से भरे हुए इन्द्र के महल की शोभा से उस सुन्दर महल को प्रकाशित करते हुए राजा दशरथ उसमें ऐसे प्रवेश कर गए जैसे चन्द्रमा तारों से भरे आकाश में प्रवेश करता है॥ 26॥
 
Illuminating that beautiful palace with the splendor of Indra's palace filled with beautiful ladies dressed in fine attire, King Dasaratha entered it just as the moon enters the star-studded sky.॥ 26॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे पञ्चम: सर्ग:॥ ५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें पाँचवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ५॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)