Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.5.10: 'रघुनन्दन! जैसे नहुष ने ययातिक का अभिषेक किया था, उसी प्रकार कल प्रातःकाल तुम्हारे पिता महाराज दशरथ अत्यन्त प्रेमपूर्वक तुम्हारा युवराज पद पर अभिषेक करेंगे।'॥10॥ | ramayan सर्ग 2.5: वसिष्ठजी का सीता सहित श्रीराम को उपवास व्रत की दीक्षा देना,राजा दशरथ का अन्तःपुर में प्रवेश । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रातस्त्वामभिषेक्ता हि यौवराज्ये नराधिप:।
पिता दशरथ: प्रीत्या ययातिं नहुषो यथा॥ १०॥
अनुवाद
'रघुनन्दन! जैसे नहुष ने ययातिक का अभिषेक किया था, उसी प्रकार कल प्रातःकाल तुम्हारे पिता महाराज दशरथ अत्यन्त प्रेमपूर्वक तुम्हारा युवराज पद पर अभिषेक करेंगे।'॥10॥
'Raghunandan! Just like Nahusha had anointed Yayatika, in the same way your father Maharaja Dasharatha will very lovingly anoint you as the crown prince tomorrow morning.'॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥