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ramayan 2.49.8: 'अहा! क्या राजा दशरथ अपने पुत्र के प्रति इतने उदासीन हो गए हैं कि वे भगवान राम को, जिन्होंने अपनी प्रजा के प्रति कोई अपराध नहीं किया है, यहाँ त्याग देना चाहते हैं?'॥8॥   |   ramayan सर्ग 2.49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.49.8 
अहो दशरथो राजा नि:स्नेह: स्वसुतं प्रति।
प्रजानामनघं रामं परित्यक्तुमिहेच्छति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'अहा! क्या राजा दशरथ अपने पुत्र के प्रति इतने उदासीन हो गए हैं कि वे भगवान राम को, जिन्होंने अपनी प्रजा के प्रति कोई अपराध नहीं किया है, यहाँ त्याग देना चाहते हैं?'॥8॥
 
'Oh! Has King Dasharath become so loveless towards his son that he wants to abandon Lord Rama, who has not committed any crime against his subjects, here?'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)