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ramayan 2.49.6: 'महाराज के पुत्र को, जो धर्मात्मा, ज्ञानी, दयालु और अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाला है, किसने घर से निकाल कर वनवास भेज दिया है?   |   ramayan सर्ग 2.49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.49.6 
या पुत्रमीदृशं राज्ञ: प्रवासयति धार्मिकम्।
वनवासे महाप्राज्ञं सानुक्रोशं जितेन्द्रियम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'महाराज के पुत्र को, जो धर्मात्मा, ज्ञानी, दयालु और अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाला है, किसने घर से निकाल कर वनवास भेज दिया है?
 
'Who has sent the Maharaja's son, who is pious, knowledgeable, kind and has controlled his senses, out of his home to go into exile?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)