Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.49.5: हाय! हाय! पापिनी, पापों में आसक्त, क्रूर और धर्म को त्यागने वाली कैकेयी को दया भी स्पर्श नहीं हुई; वह अब केवल निर्दय कर्मों में ही लगी हुई है॥5॥ | ramayan सर्ग 2.49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हा नृशंसाद्य कैकेयी पापा पापानुबन्धिनी।
तीक्ष्णा सम्भिन्नमर्यादा तीक्ष्णकर्मणि वर्तते॥ ५॥
अनुवाद
हाय! हाय! पापिनी, पापों में आसक्त, क्रूर और धर्म को त्यागने वाली कैकेयी को दया भी स्पर्श नहीं हुई; वह अब केवल निर्दय कर्मों में ही लगी हुई है॥5॥
'Alas! Alas! Sinful, addicted to sins, cruel and one who has forsaken the morals of religion, Kaikeyi has not even been touched by mercy; she is now engaged only in ruthless deeds.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥