Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.49.10: तत्पश्चात् शीतल एवं सुखद जल प्रवाहित करने वाली वेदश्रुति नामक नदी को पार करके श्री रामचन्द्रजी अगस्त्य की सेवा में दक्षिण दिशा की ओर चले॥10॥ | ramayan सर्ग 2.49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो वेदश्रुतिं नाम शिववारिवहां नदीम्।
उत्तीर्याभिमुख: प्रायादगस्त्याध्युषितां दिशम्॥ १०॥
अनुवाद
तत्पश्चात् शीतल एवं सुखद जल प्रवाहित करने वाली वेदश्रुति नामक नदी को पार करके श्री रामचन्द्रजी अगस्त्य की सेवा में दक्षिण दिशा की ओर चले॥10॥
Thereafter, crossing the river named Vedashruti, which flows cool and pleasant water, Shri Ramchandraji moved towards the south in the service of Agastya. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥