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ramayan 2.49.1: उधर, नरसिंह श्री राम अपने पिता की आज्ञा को बार-बार स्मरण करते हुए शेष रात्रि में बहुत दूर चले गए।   |   ramayan सर्ग 2.49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 49: ग्रामवासियों की बातें सुनते हुए श्रीराम का कोसल जनपद को लाँघते हुए आगे जाना और वेदश्रुति, गोमती एवं स्यन्दि का नदियों को पार करके सुमन्त्र से कुछ कहना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.49.1 
रामोऽपि रात्रिशेषेण तेनैव महदन्तरम्।
जगाम पुरुषव्याघ्र: पितुराज्ञामनुस्मरन्॥ १॥
 
 
अनुवाद
उधर, नरसिंह श्री राम अपने पिता की आज्ञा को बार-बार स्मरण करते हुए शेष रात्रि में बहुत दूर चले गए।
 
On the other hand, the man-lion Shri Ram, remembering his father's orders again and again, went very far away during the remaining night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)