श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.48.5 
नष्टं दृष्ट्वा नाभ्यनन्दन् विपुलं वा धनागमम्।
पुत्रं प्रथमजं लब्ध्वा जननी नाप्यनन्दत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
खोई हुई वस्तु पाकर भी कोई प्रसन्न नहीं हुआ; बहुत-सा धन पाकर भी किसी ने उसे बधाई नहीं दी। यहाँ तक कि जिस माता ने पहली बार पुत्र को जन्म दिया था, वह भी प्रसन्न नहीं हुई ॥5॥
 
No one was happy even after finding the lost object; no one congratulated him even after getting a lot of wealth. Even the mother who had given birth to a son for the first time was not happy. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)