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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना
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श्लोक 32
श्लोक
2.48.32
तास्तथा विलपन्त्यस्तु नगरे नागरस्त्रिय:।
चुक्रुशुर्दु:खसंतप्ता मृत्योरिव भयागमे॥ ३२॥
अनुवाद
नगर के नागरिकों की स्त्रियाँ शोक से पीड़ित होकर इस प्रकार जोर-जोर से रोने लगीं, मानो मृत्यु का भय उन पर छा गया हो।
The women of the citizens of the city began to cry loudly in this wailing manner, tormented by grief, as if the fear of death had come upon them. 32.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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