श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.48.28 
मिथ्याप्रव्राजितो राम: सभार्य: सहलक्ष्मण:।
भरते संनिबद्धा: स्म: सौनिके पशवो यथा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
झूठे वरदान की कल्पना करके श्री राम को पत्नी और लक्ष्मण सहित वनवास दे दिया गया और हम लोगों को भरत के साथ बाँध दिया गया। अब हमारी दशा कसाई के घर बँधे हुए पशुओं के समान हो गई है॥ 28॥
 
‘By imagining a false boon, Shri Ram was exiled along with his wife and Lakshman and we were tied with Bharat. Now our condition has become like that of animals tied at a butcher's house.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)