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सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना
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श्लोक 24
श्लोक
2.48.24
या पुत्रं पार्थिवेन्द्रस्य प्रवासयति निर्घृणा।
कस्तां प्राप्य सुखं जीवेदधर्म्यां दुष्टचारिणीम्॥ २४॥
अनुवाद
'जिस निर्दयी और दुष्ट स्वभाव वाली स्त्री कैकेयी ने महाराज के पुत्र को राज्य से निकाल दिया था, उसके शासन में कौन सुखपूर्वक रह सकता है?॥ 24॥
'Who can live happily under the rule of that ruthless and evil-natured woman Kaikeyi who had got the Maharaja's son expelled from the kingdom?॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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