श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  2.48.15-16 
पादपा: पर्वताग्रेषु रमयिष्यन्ति राघवम्।
यत्र रामो भयं नात्र नास्ति तत्र पराभव:॥ १५॥
स हि शूरो महाबाहु: पुत्रो दशरथस्य च।
पुरा भवति नोऽदूरादनुगच्छाम राघवम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पर्वत शिखरों पर उगे वृक्ष श्री रघुनाथजी का मनोरंजन करेंगे। जहाँ श्री राम हैं, वहाँ कोई भय नहीं है और उन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता, क्योंकि दशरथनंदन महाबाहु श्री राम अत्यंत वीर योद्धा हैं। अतः इससे पहले कि वे हमसे बहुत दूर चले जाएँ, हमें उनके पास पहुँचकर उनका पीछा करना चाहिए।
 
‘The trees growing on the mountain peaks will entertain Shri Raghunathji. Where Shri Ram is, there is no fear and no one can defeat him because Dasharathanandan Mahabahu Shri Ram is a very brave warrior. Therefore, before he goes too far away from us, we should reach him and follow him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)