श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 48: नगरनिवासिनी स्त्रियों का विलाप करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.48.11 
काननं वापि शैलं वा यं रामोऽनुगमिष्यति।
प्रियातिथिमिव प्राप्तं नैनं शक्ष्यन्त्यनर्चितुम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'श्री राम जिस किसी वन या पर्वत पर जाएंगे, वन और पर्वत उन्हें अपने प्रिय अतिथि के समान वहां आते देख उनकी पूजा करने से स्वयं को नहीं रोक पाएंगे।
 
'Wherever Shri Ram will go to any forest or mountain, the forests and mountains will not be able to stop themselves from worshipping him on seeing him arriving there like their dear guest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)