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ramayan 2.47.8: अथवा यहाँ बहुत बड़ी-बड़ी सूखी लकड़ियाँ पड़ी हैं; उनसे चिता जलाकर हम सब उसमें प्रवेश करें॥8॥   |   ramayan सर्ग 2.47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.47.8 
सन्ति शुष्काणि काष्ठानि प्रभूतानि महान्ति च।
तै: प्रज्वाल्य चितां सर्वे प्रविशामोऽथवा वयम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अथवा यहाँ बहुत बड़ी-बड़ी सूखी लकड़ियाँ पड़ी हैं; उनसे चिता जलाकर हम सब उसमें प्रवेश करें॥8॥
 
‘Or there are many large dry logs lying here; let us light a pyre from them and then all of us may enter that.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)