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ramayan 2.47.7: अब हमें यहीं प्राण त्याग देने चाहिए अथवा मरकर उत्तर दिशा की ओर चले जाना चाहिए। श्री राम के बिना हमारा जीना किस प्रकार लाभदायक हो सकता है?॥ 7॥   |   ramayan सर्ग 2.47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.47.7 
इहैव निधनं याम महाप्रस्थानमेव वा।
रामेण रहितानां नो किमर्थं जीवितं हितम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अब हमें यहीं प्राण त्याग देने चाहिए अथवा मरकर उत्तर दिशा की ओर चले जाना चाहिए। श्री राम के बिना हमारा जीना किस प्रकार लाभदायक हो सकता है?॥ 7॥
 
‘Now should we give up our lives here or decide to die and move towards the north. How can it be beneficial for us to live without Shri Ram?॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)