Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.47.4: 'हाय! हमारी नींद को धिक्कार है, जिसके कारण हम अचेत हो गए और विशाल वक्षस्थल तथा महाबाहु श्री राम के दर्शन से वंचित रह गए।   |   ramayan सर्ग 2.47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.47.4 
धिगस्तु खलु निद्रां तां ययापहतचेतस:।
नाद्य पश्यामहे रामं पृथूरस्कं महाभुजम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'हाय! हमारी नींद को धिक्कार है, जिसके कारण हम अचेत हो गए और विशाल वक्षस्थल तथा महाबाहु श्री राम के दर्शन से वंचित रह गए।
 
'Alas! Shame on our sleep, due to which we became unconscious and were deprived of the sight of the huge-chested and mighty-armed Sri Rama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)