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ramayan 2.47.16: उस नगर को देखकर उसका हृदय दुःख से भर गया। उसकी शोकग्रस्त आँखों से आँसू बहने लगे।   |   ramayan सर्ग 2.47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 47: प्रातःकाल उठने पर पुरवासियों का विलाप करना और निराश होकर नगर को लौटना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.47.16 
आलोक्य नगरीं तां च क्षयव्याकुलमानसा:।
आवर्तयन्त तेऽश्रूणि नयनै: शोकपीडितै:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उस नगर को देखकर उसका हृदय दुःख से भर गया। उसकी शोकग्रस्त आँखों से आँसू बहने लगे।
 
On seeing that city his heart was filled with sorrow. His grief-stricken eyes began to shed tears.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)