श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.46.7 
भरत: खलु धर्मात्मा पितरं मातरं च मे।
धर्मार्थकामसहितैर्वाक्यैराश्वासयिष्यति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
"परन्तु भरत बड़े धार्मिक पुरुष हैं। वे धर्म, अर्थ और काम के पक्ष में वचन कहकर मेरे पिता और माता को अवश्य ही सांत्वना देंगे।"
 
‘But Bharata is a very religious man. He will certainly console my father and my mother by saying words in favour of Dharma, Artha and Kama. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)