श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.46.34 
तत: समास्थाय रथं महारथ:
ससारथिर्दाशरथिर्वनं ययौ।
उदङ्मुखं तं तु रथं चकार
प्रयाणमाङ्गल्यनिमित्तदर्शनात्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महारथी श्री राम ने अपने सारथि के साथ यात्रा के शुभ शकुनों को देखने के लिए पहले रथ को उत्तर दिशा में रोक लिया; फिर वे रथ पर सवार होकर वन की ओर चल पड़े।
 
Thereafter the great charioteer Sri Rama along with his charioteer first stopped the chariot facing north in order to observe the auspicious omens during the journey; then he mounted the chariot and proceeded towards the forest.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे षट्चत्वारिंश: सर्ग:॥ ४६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें छियालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४६॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)