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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 46: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रात्रि में तमसा-तट पर निवास, पुरवासियों को सोते छोड़कर वन की ओर जाना
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श्लोक 21
श्लोक
2.46.21
यावदेव तु संसुप्तास्तावदेव वयं लघु।
रथमारुह्य गच्छाम: पन्थानमकुतोभयम्॥ २१॥
अनुवाद
अतः जब तक वह सो रहा है, हम शीघ्र ही अपने रथ पर सवार होकर यहाँ से चले जाएँ। तब हमें इस मार्ग पर आनेवाले किसी अन्य व्यक्ति का भय नहीं रहेगा॥ 21॥
‘So while he is sleeping, let us quickly ride our chariot and leave from here. Then we will not have to fear anyone else coming on this route.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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