श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.45.9 
स हि राजगुणैर्युक्तो युवराज: समीक्षित:।
अपि चापि मया शिष्टै: कार्यं वो भर्तृशासनम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'वह मुझसे भी अधिक राजसी गुणों से युक्त है, इसलिए राजा ने उसे युवराज बनाने का निश्चय किया है; इसलिए तुम सब लोग अपने स्वामी भरत की आज्ञा का सदैव पालन करो॥9॥
 
'He is more endowed with royal qualities than I am, therefore the King has decided to make him the crown prince; therefore you all must always obey the orders of your master Bharat.॥ 9॥
 ✨ ai-generated