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ramayan 2.45.6: 'अयोध्यावासियों का मुझ पर जो प्रेम और आदर है, वह मेरे सुख के लिए भरत पर और भी अधिक हो।॥6॥   |   ramayan सर्ग 2.45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.45.6 
या प्रीतिर्बहुमानश्च मय्ययोध्यानिवासिनाम्।
मत्प्रियार्थं विशेषेण भरते सा विधीयताम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'अयोध्यावासियों का मुझ पर जो प्रेम और आदर है, वह मेरे सुख के लिए भरत पर और भी अधिक हो।॥6॥
 
'The love and respect that the people of Ayodhya have for me, should be extended even more to Bharat for my own happiness.॥6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)