Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.45.4: उन प्रजाजनों ने श्री राम से घर लौट जाने का अनुरोध किया, परंतु वे पिता के सत्य की रक्षा के लिए वन की ओर चल पड़े॥4॥   |   ramayan सर्ग 2.45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.45.4 
स याच्यमान: काकुत्स्थस्ताभि: प्रकृतिभिस्तदा।
कुर्वाण: पितरं सत्यं वनमेवान्वपद्यत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उन प्रजाजनों ने श्री राम से घर लौट जाने का अनुरोध किया, परंतु वे पिता के सत्य की रक्षा के लिए वन की ओर चल पड़े॥4॥
 
Those subjects requested Shri Ram to return home, but he proceeded towards the forest to protect the truth of his father. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)