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ramayan 2.45.3: क्योंकि अयोध्यावासियों के लिए गुणों से परिपूर्ण महान एवं यशस्वी श्री राम पूर्णिमा के समान प्रिय हो गए थे।   |   ramayan सर्ग 2.45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.45.3 
अयोध्यानिलयानां हि पुरुषाणां महायशा:।
बभूव गुणसम्पन्न: पूर्णचन्द्र इव प्रिय:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि अयोध्यावासियों के लिए गुणों से परिपूर्ण महान एवं यशस्वी श्री राम पूर्णिमा के समान प्रिय हो गए थे।
 
Because for the people of Ayodhya, the great and famous Shri Ram, full of virtues, had become as dear as the full moon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)