श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.45.28 
बहूनां वितता यज्ञा द्विजानां य इहागता:।
तेषां समाप्तिरायत्ता तव वत्स निवर्तने॥ २८॥
 
 
अनुवाद
(इसके बाद भी जब श्री राम नहीं रुके, तब ब्राह्मण ने कहा-) बेटा! यहाँ जो लोग आये हैं, उनमें बहुत से ब्राह्मण ऐसे हैं जिन्होंने यज्ञ आरम्भ कर दिया है; अब उनके यज्ञों का पूर्ण होना तुम्हारे लौटने पर निर्भर है।
 
(Even after this when Shri Ram did not stop, then the Brahmin said-) Son! Among the people who have come here, there are many Brahmins who have started Yagya; now the completion of their Yagyas depends on your return.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)