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ramayan 2.45.27: हे सद्गुणों के पोषक श्री राम! हमारे केश हंस के समान सफेद हो गए हैं और भूमि पर प्रणाम करने से धूल से ढक गए हैं। हम आपसे सिर झुकाकर प्रार्थना करते हैं कि आप घर लौट जाएँ। (वे बुद्धिमान ब्राह्मण जानते थे कि श्री राम स्वयं भगवान विष्णु हैं। अतः उनके द्वारा श्री राम को प्रणाम करने में कोई दोष नहीं है।)   |   ramayan सर्ग 2.45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.27 
याचितो नो निवर्तस्व हंसशुक्लशिरोरुहै:।
शिरोभिर्निभृताचार महीपतनपांसुलै:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे सद्गुणों के पोषक श्री राम! हमारे केश हंस के समान सफेद हो गए हैं और भूमि पर प्रणाम करने से धूल से ढक गए हैं। हम आपसे सिर झुकाकर प्रार्थना करते हैं कि आप घर लौट जाएँ। (वे बुद्धिमान ब्राह्मण जानते थे कि श्री राम स्वयं भगवान विष्णु हैं। अतः उनके द्वारा श्री राम को प्रणाम करने में कोई दोष नहीं है।)
 
'O Shri Ram, the nurturer of virtue! Our hair has turned grey and white like that of a swan and has become covered with dust due to prostrating on the ground. We beg you with our heads bowed down to return home (those wise Brahmins knew that Shri Ram is Lord Vishnu himself. Hence, there is nothing wrong in their prostrating to Shri Ram).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)