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ramayan 2.45.25: वेद, जो हमारी सबसे बड़ी सम्पत्ति है, हमारे हृदय में स्थित हैं। हमारी स्त्रियाँ अपने दृढ़ चरित्र के कारण अपने घरों में सुरक्षित रहेंगी।॥25॥   |   ramayan सर्ग 2.45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.45.25 
हृदयेष्ववतिष्ठन्ते वेदा ये न: परं धनम्।
वत्स्यन्त्यपि गृहेष्वेव दाराश्चारित्ररक्षिता:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वेद, जो हमारी सबसे बड़ी सम्पत्ति है, हमारे हृदय में स्थित हैं। हमारी स्त्रियाँ अपने दृढ़ चरित्र के कारण अपने घरों में सुरक्षित रहेंगी।॥25॥
 
‘The Vedas, which are our greatest wealth, are situated in our hearts. Our women will remain safe in their homes due to their strong character.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)