Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.45.24: 'बेटा! हमारी जो बुद्धि सदैव वेदमंत्रों का पालन करती थी और उन्हीं के चिंतन में लीन रहती थी, वही तुम्हें वनवास का पालन कराने वाली हो गई है॥ 24॥ | ramayan सर्ग 2.45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
या हि न: सततं बुद्धिर्वेदमन्त्रानुसारिणी।
त्वत्कृते सा कृता वत्स वनवासानुसारिणी॥ २४॥
अनुवाद
'बेटा! हमारी जो बुद्धि सदैव वेदमंत्रों का पालन करती थी और उन्हीं के चिंतन में लीन रहती थी, वही तुम्हें वनवास का पालन कराने वाली हो गई है॥ 24॥
'Son! Our intellect which always followed the Vedic mantras and remained absorbed in thinking about them, has become the one that will make you follow the exile.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥