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ramayan 2.45.20: श्री रामजी को अब भी वन की ओर जाते देखकर वह ब्राह्मण घबरा गया और अत्यन्त व्याकुल होकर उनसे इस प्रकार बोला -॥20॥   |   ramayan सर्ग 2.45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.45.20 
गच्छन्तमेव तं दृष्ट्वा रामं सम्भ्रान्तमानसा:।
ऊचु: परमसंतप्ता रामं वाक्यमिदं द्विजा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी को अब भी वन की ओर जाते देखकर वह ब्राह्मण घबरा गया और अत्यन्त व्याकुल होकर उनसे इस प्रकार बोला -॥20॥
 
Seeing that Sri Rama was still going towards the forest, the Brahmin became alarmed and in great distress spoke to him thus -॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)