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ramayan 2.45.2: जब राजा दशरथ को 'जिन कुटुम्बियों का शीघ्र लौटना हो, उन्हें दूर नहीं भेजना चाहिए', इस प्रकार कहे गए उत्तम सिद्धांतों के अनुसार बलपूर्वक वापस भेज दिया गया, तब भी भगवान राम के रथ के पीछे चलने वाले अयोध्यावासी अपने घर नहीं लौटे॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 2.45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  2.45.2 
निवर्तितेऽतीव बलात् सुहृद्धर्मेण राजनि।
नैव ते संन्यवर्तन्त रामस्यानुगता रथम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
जब राजा दशरथ को 'जिन कुटुम्बियों का शीघ्र लौटना हो, उन्हें दूर नहीं भेजना चाहिए', इस प्रकार कहे गए उत्तम सिद्धांतों के अनुसार बलपूर्वक वापस भेज दिया गया, तब भी भगवान राम के रथ के पीछे चलने वाले अयोध्यावासी अपने घर नहीं लौटे॥ 2॥
 
When King Dasharatha was forcibly sent back according to the good principles stated in the form of 'relatives whose speedy return is desired should not be sent far', even then the people of Ayodhya who were following Lord Rama's chariot did not return to their homes.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)