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ramayan 2.45.13: उनमें बहुत से ब्राह्मण ऐसे थे जो विद्या, आयु और आध्यात्मिक बल तीनों में श्रेष्ठ थे। कुछ के सिर वृद्धावस्था के कारण हिल रहे थे। वे दूर से इस प्रकार बोल रहे थे-॥13॥   |   ramayan सर्ग 2.45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.45.13 
ते द्विजास्त्रिविधं वृद्धा ज्ञानेन वयसौजसा।
वय:प्रकम्पशिरसो दूरादूचुरिदं वच:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उनमें बहुत से ब्राह्मण ऐसे थे जो विद्या, आयु और आध्यात्मिक बल तीनों में श्रेष्ठ थे। कुछ के सिर वृद्धावस्था के कारण हिल रहे थे। वे दूर से इस प्रकार बोल रहे थे-॥13॥
 
There were many Brahmins among them who were superior in all three aspects- knowledge, age and spiritual power. Some had their heads shaking due to old age. They spoke from a distance in this manner-॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)