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ramayan 2.45.11: जैसे ही दशरथनंदन श्री राम ने धर्म की शरण लेने का दृढ़ संकल्प दिखाया, लोगों की उन्हें अपना स्वामी बनाने की इच्छा प्रबल हो गई।   |   ramayan सर्ग 2.45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.45.11 
यथा यथा दाशरथिर्धर्ममेवाश्रितो भवेत्।
तथा तथा प्रकृतयो रामं पतिमकामयन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही दशरथनंदन श्री राम ने धर्म की शरण लेने का दृढ़ संकल्प दिखाया, लोगों की उन्हें अपना स्वामी बनाने की इच्छा प्रबल हो गई।
 
As Dasharathanandan Shri Ram showed determination in taking refuge in Dharma, the desire of the people to make him their master became stronger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)