Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.45.10: तुम्हें सदैव यह प्रयत्न करना चाहिए कि मेरे वन जाने पर राजा दशरथ को दुःख न हो। मुझे प्रसन्न करने के लिए तुम्हें मेरी प्रार्थना पर ध्यान देना होगा।' | ramayan सर्ग 2.45: नगर के वृद्ध ब्राह्मणों का श्रीराम से लौट चलने के लिये आग्रह करना तथा उन सबके साथ श्रीराम का तमसा तट पर पहुँचना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न संतप्येद् यथा चासौ वनवासं गते मयि।
महाराजस्तथा कार्यो मम प्रियचिकीर्षया॥ १०॥
अनुवाद
तुम्हें सदैव यह प्रयत्न करना चाहिए कि मेरे वन जाने पर राजा दशरथ को दुःख न हो। मुझे प्रसन्न करने के लिए तुम्हें मेरी प्रार्थना पर ध्यान देना होगा।'
‘You should always try to ensure that King Dasharath does not feel sad after my departure to the forest. You must pay heed to my request to please me.’
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥