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ramayan 2.44.3-4: 'बहन! आपके महान पुत्र श्री राम, जो अपने महान पिता को धर्मपरायण बनाने के लिए राज्य छोड़कर वन में चले गए हैं, उस उत्तम धर्म में स्थित हैं, जिसका पालन सज्जनों ने सदैव यथायोग्य रीति से किया है और जो परलोक में भी सुखदायी फल देता है। ऐसे धर्मात्मा पुरुष के लिए कभी शोक नहीं करना चाहिए। 3-4॥   |   ramayan सर्ग 2.44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 44: सुमित्रा का कौसल्या को आश्वासन देना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  2.44.3-4 
यस्तवार्ये गत: पुत्रस्त्यक्त्वा राज्यं महाबल:।
साधु कुर्वन् महात्मानं पितरं सत्यवादिनम्॥ ३॥
शिष्टैराचरिते सम्यक‍्शश्वत् प्रेत्य फलोदये।
रामो धर्मे स्थित: श्रेष्ठो न स शोच्य: कदाचन॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'बहन! आपके महान पुत्र श्री राम, जो अपने महान पिता को धर्मपरायण बनाने के लिए राज्य छोड़कर वन में चले गए हैं, उस उत्तम धर्म में स्थित हैं, जिसका पालन सज्जनों ने सदैव यथायोग्य रीति से किया है और जो परलोक में भी सुखदायी फल देता है। ऐसे धर्मात्मा पुरुष के लिए कभी शोक नहीं करना चाहिए। 3-4॥
 
'Sister! Your great son Shri Ram, who has left the kingdom and gone to the forest to make his great father a true believer, is situated in that noble religion, which has always been followed by good men in the right way and which gives happy results in the next world also. One should never mourn for such a righteous person. 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)