श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 43: महारानी कौसल्या का विलाप  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.43.15 
कदा सुमनस: कन्या द्विजातीनां फलानि च।
प्रदिशन्त्य: पुरीं हृष्टा: करिष्यन्ति प्रदक्षिणम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘ब्राह्मणों की कन्याएँ कब प्रसन्नतापूर्वक पुष्प और फल अर्पित करती हुई अयोध्या नगरी की परिक्रमा करेंगी?॥15॥
 
‘When will the daughters of the Brahmins joyfully circumambulate the city of Ayodhya, offering flowers and fruits?॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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