| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 43: महारानी कौसल्या का विलाप » श्लोक 13 |
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| | | | श्लोक 2.43.13  | कदा प्राणिसहस्राणि राजमार्गे ममात्मजौ।
लाजैरवकरिष्यन्ति प्रविशन्तावरिंदमौ॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | 'कब यहाँ से हजारों लोग नगर में प्रवेश करके राजमार्ग पर चलते हुए शत्रुओं का नाश करने वाले मेरे दोनों पुत्रों पर लावा (आटा) बरसाएँगे?॥13॥ | | | | 'When will thousands of people from here, entering the city and walking on the highway, shower lava (flour) on my two sons, the destroyers of enemies?॥ 13॥ | | ✨ ai-generated | | |
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