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ramayan 2.40.39: उस समय जब श्री रामचन्द्रजी ने पीछे मुड़कर देखा तो उन्होंने अपने उदास और भ्रमित पिता राजा दशरथ और शोक से पीड़ित माता कौशल्या दोनों को मार्ग में पीछे आते देखा॥39॥   |   ramayan सर्ग 2.40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.40.39 
अन्वीक्षमाणो रामस्तु विषण्णं भ्रान्तचेतसम्।
राजानं मातरं चैव ददर्शानुगतौ पथि॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उस समय जब श्री रामचन्द्रजी ने पीछे मुड़कर देखा तो उन्होंने अपने उदास और भ्रमित पिता राजा दशरथ और शोक से पीड़ित माता कौशल्या दोनों को मार्ग में पीछे आते देखा॥39॥
 
At that time, when Shri Ramchandra ji looked back, he saw both his depressed and confused father King Dasharatha and his grief-stricken mother Kausalya following him on the road. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)