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ramayan 2.40.30: उस समय श्री राम के पिता, ककुत्स्थ वंश के पूज्य राजा दशरथ, उसी प्रकार उदास दिखाई दे रहे थे, जैसे राहु से पीड़ित होने पर उत्सव के समय पूर्ण चन्द्रमा उदास दिखाई देता है ॥30॥   |   ramayan सर्ग 2.40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.40.30 
पिता हि राजा काकुत्स्थ: श्रीमान् सन्नस्तदा बभौ।
परिपूर्ण: शशी काले ग्रहेणोपप्लुतो यथा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उस समय श्री राम के पिता, ककुत्स्थ वंश के पूज्य राजा दशरथ, उसी प्रकार उदास दिखाई दे रहे थे, जैसे राहु से पीड़ित होने पर उत्सव के समय पूर्ण चन्द्रमा उदास दिखाई देता है ॥30॥
 
At that time, Sri Rama's father, the revered King Dasharatha of the Kakutstha dynasty, appeared disheartened just as the full moon appears destitute during a festival when afflicted by Rahu. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)