vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान
»
श्लोक 3
श्लोक
2.40.3
अन्वक्षं लक्ष्मणो भ्रातु: कौसल्यामभ्यवादयत्।
अपि मातु: सुमित्राया जग्राह चरणौ पुन:॥ ३॥
अनुवाद
श्री राम के बाद लक्ष्मण ने भी सबसे पहले माता कौशल्या को प्रणाम किया और फिर अपनी माता सुमित्रा के चरण पकड़ लिए।
After Shri Ram, Lakshman also first bowed to mother Kausalya and then held the feet of his mother Sumitra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×