श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 40: सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीता सहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथ में बैठकर वन की ओर प्रस्थान  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.40.27 
एवं वदन्तस्ते सोढुं न शेकुर्बाष्पमागतम्।
नरास्तमनुगच्छन्ति प्रियमिक्ष्वाकुनन्दनम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
ऐसी बातें कहते हुए नगरवासी अपने आँसुओं का वेग न सह सके। वे सबके प्रिय, इक्ष्वाकुवंशी पुत्र श्री रामचन्द्रजी के पीछे-पीछे चल रहे थे॥ 27॥
 
While saying such things, the people of the city could not bear the force of their tears. They were following everyone's beloved, Ikshwaku clan's son Shri Ramchandraji.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)